विद्यापति शिव एवं शक्ति दोनों के प्रबल भक्त थे। शक्ति के रुप में उन्होंने दुर्गा, काली, भैरवि, गंगा, गौरी आदि का वर्णन अपनी रचनाओं में यथेष्ठ किया है। मिथिला के लोगों में यह बात आज भी व्याप्त है कि जब महाकवि
विद्यापति काफी उम्र के होकर रुग्न हो गए तो अपने पुत्रों और परिजनों को बुलाकर यह आदेश दिया:
“अब मैं इस शरीर का त्याग करना चाहता हूँ। मेरी इच्छा है कि मैं गंगा के किनारे गंगाजल को स्पर्श करता हुआ अपने दीर्ध जीवन का अन्तिम सांस लूं। अत: आप लोग मुझे गंगालाभ कराने की तैयारी में लग जाएं। कहरिया को बुलाकर उस पर बैठाकर आज ही हमें सिमरिया घाट (गंगातट) ले चलें।”
अब परिवार के लोगों ने महाकवि का आज्ञा का पालन करते हुए चार कहरियों को बुलाकर महाकवि के जीर्ण शरीर को पालकी में सुलाकर सिमरिया घाट गंगालाभ कराने के लिए चल पड़े – आगे-आगे कहरिया पालकी लेकर और पीछे-पीछे उनके सगे-सम्बन्धी। रात-भर चलते-चलते जब सूर्योदय हुआ तो विद्यापति ने पूछा: “भाई, मुझे यह तो बताओं कि गंगा और कितनी दूर है?”
“ठाकुरजी, करीब पौने दो कोस।” कहरियों ने जवाब दिया। इस पर आत्मविश्वास से भरे महाकवि यकाएक बोल उठे: “मेरी पालकी को यहीं रोक दो। गंगा यहीं आएंगी।”
“ठाकुरजी, ऐसा संभव नहीं है। गंगा यहाँ से पौने दो कोस की दूरी पर बह रही है। वह भला यहाँ कैसे आऐगी? आप थोड़ी धैर्य रक्खें। एक घंटे के अन्दर हम लोग सिमरिया घाट पहुँच जाएंगे।”
“नहीं-नहीं, पालकी रोके” महाकवि कहने लगे, “हमें और आगे जाने की जरुरत नहीं। गंगा यहीं आएगी। आगर एक बेटा जीवन के अन्तिम क्षण में अपनी माँ के दर्शन के लिए जीर्ण शरीर को लेकर इतने दूर से आ रहा है तो क्या गंगा माँ पौने दो कोस भी अपने बेटे से मिलने नहीं आ सकती? गंगा आएगी और जरुर आएगी।”
इतना कहकर महाकवि ध्यानमुद्रा में बैठ गए। पन्द्रह-बीस मिनट के अन्दर गंगा अपनी उफनती धारा के प्रवाह के साथ वहाँ पहुँच गयी। सभी लोग आश्चर्य में थे। महाकवि ने सर्वप्रथम गंगा को दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम किया, फिर जल में प्रवेश कर निम्नलिखित गीत की रचना की:
बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे।
छोड़इत निकट नयन बह नीरे।।
करनोरि बिलमओ बिमल तरंगे।
पुनि दरसन होए पुनमति गंगे।।
एक अपराध घमब मोर जानी।
परमल माए पाए तुम पानी।।
कि करब जप-तप जोग-धेआने।
जनम कृतारथ एकहि सनाने।।
भनई विद्यापति समदजों तोही।
अन्तकाल जनु बिसरह मोही।।
इस गंगा स्तुति का अर्थ कुछ इस प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है:
“हे माँ पतित पावनि गंगे, तुम्हारे तट पर बैठकर मैंने संसार का अपूर्व सुख प्राप्त किया। तुम्हारा सामीप्य छोड़ते हुए अब आँखों से आँसू बह रहे हैं। निर्मल तरंगोवानी पूज्यमती गंगे! मैं कर जोड़ कर तुम्हारी विनती करता हूँ कि पुन: तुम्हारे दर्शन हों।”
ठमेरे एक अपराध को जानकर भी समा कर देना कि हे माँ! मैंने तुम्हें अपने पैरों से स्पर्श कर दिया। अब जप-तप, योग-ध्यान की क्या आवश्यकता? एक ही स्नान में मेरा जन्म कृतार्थ हो गया। विद्यापति तुमसे (बार-बार) निवेदन करते है कि मृत्यु के समय मुझे मत भूलना।”
Tuesday, July 26, 2011
Thursday, April 14, 2011
Monday, February 14, 2011
Tuesday, November 30, 2010
क्या है सच्चा प्यार
Dushyant: क्या है सच्चा प्यार ? आओ सुनो एक कहानी एक चिडिया को एक सफ़ेद गुलाब से प्यार हो गया , उसने गुलाब को प्रपोस किया , गुलाब ने जवाब दिया की जिस दिन मै लाल हो जाऊंगा उस दिन मै तुमसे प्यार करूँगा , जवाब सुनके चिडिया गुलाब के आस पास काँटों में लोटने लगी और उसके खून से गुलाब लाल हो गया, ये देखके गुलाब ने भी उससे कहा की वो उससे प्यार करता है पर तब तक चिडिया मर चुकी थी इसीलिए कहा गया है की सच्चे प्यार का कभी भी इम्तहान नहीं लेना चाहिए, क्यूंकि सच्चा प्यार कभी इम्तहान का मोहताज नहीं होता है , ये वो फलसफा; है जो आँखों से बया होता है , ये जरूरी नहीं की तुम जिसे प्यार करो वो तुम्हे प्यार दे , बल्कि जरूरी ये है की जो तुम्हे प्यार करे तुम उसे जी भर कर प्यार दो, फिर देखो ये दुनिया जन्नत सी लगेगी प्यार खुदा की ही बन्दगी है ,खुदा भी प्यार करने वालो के साथ रहता है,
Thursday, August 19, 2010
15, August
15, August 1947, ko hamara desh aazd huaa. magar aaj 63 saal bad bhi hum puri tarh se aazd nahi hai. shaid bhagat singh ka sapna aaj bhi adhura hai. aaj hamare desh mai bharstahhr bathi ja rahii hai. is main koi bideshi hath hai nahi. is ke ander hare hi desh ke kuch gushkhor officer ka haath hai .
kay zaruri hai CWG main itna pasia barwad karne hi. hamre desh main itne log garib hain jine do waqt ki roti nahi milti. or hum duniya ko kya dikhana chahte hai.
jai hind
kay zaruri hai CWG main itna pasia barwad karne hi. hamre desh main itne log garib hain jine do waqt ki roti nahi milti. or hum duniya ko kya dikhana chahte hai.
jai hind
Friday, June 25, 2010
आज कल badti हत्या का एक कारण है प्रेम
aaj kal badti hatya ka karan hai prem. jab ek premi ko dhokha milta hai to wo hatya karta hai. aajkal pyar ek kapde ki trah hai. pyar mai ab sex ek part ban gaya hai. jo ki pyar ke matlab ko badal kar rakh diya hai. aaj kal kapde ki trah boyfriend or girlfriend badle jaate hai. jo ki hatya ka ek karan banta hai. jab tak ye khatm nhi hata tab tak htaya hote rahege. is ghatna mai 90% ladkiyo ka hath hata hai. mera ek sandesh hai mere dosto se ki pyar sirf ek se kro. dosti kro magar dil kise ek se lagao jiske saath umar bhar rahe.
pyar mai kabhi jhuth ka saath mat lo.
kisene thik likha hai :-
dil do kise ek ko,
wo bhi kise nak ko,
ye mandir ka parsaad nahi jo batdo har ek ko.
ek guzarish pyar main jaan kabhi mat do.
jaan dene se phale apne mata pita ke bare mai socho.
kyuki is ladki ko tum 2 se 3 saal se jante hoge.jab tum uske liye mar sakte ho to us maa baap ke liye ji nahi sakte jisne tumhe zanam diya.
tumhara dost:
Dheeraj Mishra
pyar mai kabhi jhuth ka saath mat lo.
kisene thik likha hai :-
dil do kise ek ko,
wo bhi kise nak ko,
ye mandir ka parsaad nahi jo batdo har ek ko.
ek guzarish pyar main jaan kabhi mat do.
jaan dene se phale apne mata pita ke bare mai socho.
kyuki is ladki ko tum 2 se 3 saal se jante hoge.jab tum uske liye mar sakte ho to us maa baap ke liye ji nahi sakte jisne tumhe zanam diya.
tumhara dost:
Dheeraj Mishra
Monday, June 14, 2010
किसने कहा प्यार कुछ नहीं देता हैं ?
किसने कहा प्यार कुछ नहीं देता हैं ?
khushi nahi to gum zarur deta hain .
wafa nahi to wewafai zarur deta hain .
hasi nahi to rona zarur deta hain .
zindgi nahi to mot zarur deta hain .
Mahafil nahi to tanhai zarur deti hain
किसने कहा प्यार कुछ नहीं देता हैं ?
khushi nahi to gum zarur deta hain .
wafa nahi to wewafai zarur deta hain .
hasi nahi to rona zarur deta hain .
zindgi nahi to mot zarur deta hain .
Mahafil nahi to tanhai zarur deti hain
किसने कहा प्यार कुछ नहीं देता हैं ?
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